सिक्किम की राजधानी गंगटोक से लगभग 40 किलोमीटर दूर गंगटोक नाथुला मार्ग पर पड़ने वाली यह रंग बदलती झील सिक्किम को कुदरत का दिया गया एक अनोखा उपहार है।समुद्र तल से 12000 फीट से अधिक ऊंचाई पर होने के कारण सर्दी के मौसम में यह जमी रहती है और और चारों तरफ की पहाड़ियों पर सफेद बर्फ की चादर ढकी रहती है।वही गर्मी के दिनों मे पहाड़ियों पर जमी यह बर्फ इस झील के पानी का स्रोत है।सर्दी के दिनों में यहां सब कुछ सफेद सफेद दिखाई देता है।वही गर्मी के मौसम आते ही चारों ओर ऊंची ऊंची ऊबड खाबड़ पहाड़ियों पर विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूल खिल जाते है।इन रंग बिरंगे फूलों के कारण यह झील एक अलग ही अलौकिक रूप धारण कर लेती है।यह झील एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित की गई है यहां पर सजे धजे याक पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं।पहाड़ों से टकराकर आने वाली ठंडी हवा के झोंके और यहां का शांत वातावरण आपको कभी न भूलने वाला अनुभव देता है।यहां पर बनी केवल कर की यात्रा करने का भी अपने आप में एक अलग ही सुखद एहसास है।पहाड़ की चोटी पर जाकर आसपास के क्षेत्र को निहारना वह फोटो लेना अपने आप में एक अलग ही रोमांस का कारण बन जाता है।यहां पर आप बरसात के मौसम को छोड़कर जिस मौसम में भी आओगे एक अलग ही नजारा पाओगे। दिसंबर से मार्च तक यह झील पूरी तरह बर्फ के ढकी रहती है इस मौसम में आप झील के किनारे बर्फ पर ट्रैकिंग मजा ले सकते हैं।अक्टूबर से दिसंबर तक यह आंशिक रूप से बर्फ से जमी रहती है इस मौसम में प्रवासी पक्षी झील में तैरते हुए मिल जाएंगे।साइबेरिया से भारतीय मैदाने की तरफ आते पक्षी इस झील को पड़ाव के रूप में इस्तेमाल करते हैं। नीले दूर तक फैले आसमान के नीचे ऊँचे पहाड़ों से घिरी यह झील एक कभी ना भूलने वाला ऐसा अलौकिक व रहसम्य नजारा पेस करती जो यहाँ आने वाले पर्यटक जीवन में कभी नहीं भूल पाते।