Chungthang, the gateway to North Sikkim नॉर्थ सिक्किम का प्रवेश द्वार चुंगथांग


दो नदियों के संगम, चारों तरफ फ़ैली हरियाली, एक अलग तरह की शांति व बर्फ से ढके ऊंचे ऊंचे पहाड़ों के बीच बसा चुंगथांग शहर पर्यटकों की आँख का तारा बना हुआ है।
गंगटोक से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर उत्तरी सिक्किम का द्वार कहे जाने वाला यह छोटा सा शहर तीस्ता नदी पर बने बांध के लिए भी प्रसिद्ध है
पश्चिम दिशा से आने वाली लाचेन जलधारा और पूर्व दिशा से आने वाली लाछुंग जलधारा के संगम पर बसा यह शहर अपने आप में प्राकृतिक सुंदरता की एक मिसाल है।
लाचेंन व लाछुंग नदियों का यह संगम सिक्किम की जीवन रेखा कहे जाने वाली तीस्ता नदी को जन्म देता है।अनुकूल मौसम होने पर यहां की रिवर राफ्टिंग पर्यटकों के बीच बहुत प्रसिद्ध है।
यहां पर बना एक सुंदर गुरुद्वारा अपने चारों ओर फैली हरियाली व शांत वातावरण के कारण एक रमणीक स्थान के रूप में प्रसिद्ध है।
यहां पडने वाली एक पवित्र चट्टान भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। चट्टान के बीच एक छोटे से छिद्र से सदैव खनिज जल धारा बहती रहती है व चट्टान के चारों ओर एक छोटे से भूभाग में यहां की विषम परिस्थिति के विपरीत भी चावल की पैदावार होना एक कोतुहल का विषय बना हुआ है।
चीन की सीमा के पास होने के कारण यहां पर भारतीय सेना का बेस कैंप बना है जिस कारण यह शहर शहर कम व छावनी ज्यादा लगता है। कोई भी अच्छा होटल या होमस्टे न होने के कारण यहां पर्यटकों का रात को ठहरना थोड़ा मुश्किल होता है इसलिए यहां आप एक या दो घंटा ही रुक सकते हैं आगे पढ़ने वाले लाचेन या लाछुंग शहर में ही रात को ठहरने की व्यवस्था हो पाएगी।

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